आज़ादी के पाँच दशक पूरे होने और आधुनिकता के तमाम आयातित अथवा मौलिक रूपों को भीतर तक आत्मसात् कर चुकने के बावजूद आज भी हम कहीं-न-कहीं सवर्ण और अवर्ण के दायरों में बँटे हुए हैं। सिद्धान्तों और किताबी बहसों से बाहर, जीवन में हमें आज भी अनेक उदाहरण मिल जाएँगे, जिनमें हमारी जाति और वर्णगत असहिष्णुता स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। ‘जूठन’ ऐसे ही उदाहरणों की श्रृंखला है जिन्हें एक दलित व्यक्ति ने अपनी पूरी संवेदनशीलता के साथ ख़ुद भोगा है। इस आत्मकथा में लेखक ने स्वाभाविक ही अपने उस ‘आत्म’ की तलाश करने की कोशिश की है जिसे भारत का वर्ण-तंत्र सदियों से कुचलने का प्रयास करता रहा है, कभी परोक्ष रूप में, कभी प्रत्यक्षत:। इसलिए इस पुस्तक की पंक्तियों में पीड़ा भी है, असहायता भी है, आक्रोश और क्रोध भी और अपने आपको आदमी का दर्जा दिए जाने की सहज मानवीय इच्छा भी।
Joothan-1 Book | जूठन-1 बुक | Omprakash Valmiki Book | Rajkamal Prakashan Book | Paper Back Book | Hindi
₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹192.00Current price is: ₹192.00.
Joothan-1 Book | जूठन-1 बुक | Omprakash Valmiki Book | Rajkamal Prakashan Book | Paper Back Book | Hindi
Categories: Books, Literature / साहित्य
Be the first to review “Joothan-1 Book | जूठन-1 बुक | Omprakash Valmiki Book | Rajkamal Prakashan Book | Paper Back Book | Hindi” Cancel reply
No more offers for this product!


Lucent GK Book
UPSSSC Previous Year Question Papers and Answer 





Reviews
There are no reviews yet.